Garhmukteshwar : यदि आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं, तो हर दिन की थकान और शहर के प्रदूषण व शोरगुल से बाहर निकलकर कुछ समय किसी शांत वातावरण और प्राकृतिक सौन्दर्य में रहकर बिताना चाहते हैं तो आज हम आपको एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम Garhmukteshwar है ,यह वीकऑफ में दिल्ली से जाने के लिए बेस्ट जगहों में से एक है ,आप यहां घूमने का प्लान बनाइए …
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Garhmukteshwar के बारे में
देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 80 किमी की दूरी पर गंगा किनारे बसा यह शहर अपने आप में ऐतिहासिक है। यह उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का एक बहुत ही प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल है, वीकऑफ पर दिल्ली से ड्राइविंग का मजा लेते हुए अगर आप कहीं नजदीक में किसी स्थान पर घूमने का मन बना रहे हैं तो Garhmukteshwar एक बेस्ट जगह है। गढ़मुक्तेश्वर प्राचीन हस्तिनापुर का हिस्सा रहा है।
पवित्र गंगा नदी शहर से केवल 5 किमी की दूरी पर स्थित है। लेकिन साथ ही गंगा नदी के ठीक किनारे पर बसा ब्रजघाट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास से ब्रजघाट को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने का कार्य तेजी से चल रहा है।
Garhmukteshwar तक कैसे पहुंचे ?

गढ़मुक्तेश्वर एनएच-9 पर बसा हुआ शहर है यहां पर यातायात की बहुत ही सुगम व्यवस्था है कहीं से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है,निकटतम हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (DEL) व हाल ही में बन रहे जेवर एयरपोर्ट की दूरी भी यहां से दिल्ली से भी कम है । रेलमार्ग की बात करें तो दिल्ली से मुरादाबाद,बरेली होते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जोड़ने वाला रूट यहीं से होकर गुजरता है।
साथ ही Garhmukteshwar और ब्रजघाट में दो अलग अलग रेलवे स्टेशन हैं। पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए बहुत सी विशेष ट्रेन का स्टॉप रखा गया है, दिल्ली से अपनी कार द्वारा आनंद विहार NH-24 से बिना किसी मोड़ के यहां मात्र एक से डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है।
Garhmukteshwar का इतिहास

Garhmukteshwar का इतिहास बहुत ही जानकारी परक और धार्मिकता से जुड़ा हुआ है। इससे जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां हैं। ऐसा माना जाता है कि यह महाभारत काल के समय हस्तिनापुर राज्य का एक हिस्सा था, और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था। एक अन्य किंवदंती में कहा गया है कि भगवान राम के पूर्वजों में से एक राजा शिवि ने अपने जीवन का अंतिम चरण यहां तपस्या करते हुए बिताया था।
साथ ही यह भी माना जाता है कि महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्री कृष्ण गढ़मुक्तेश्वर आए थे और युद्ध में मारे गए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गंगा जी में दीपदान किया था। यहां पर स्थित नक्का कुआ मन्दिर में भगवान परशुराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है। गढ़मुक्तेश्वर और इससे जुड़ा हुआ शहर, बृजघाट अपने आप में 100 से अधिक मंदिरों का घर है।
Garhmukteshwar के आसपास के प्रसिद्ध स्थल

Garhmukteshwar में सबसे प्राचीन गंगा मंदिर 80 फिट ऊंचे टीले पर स्थित है जहां पहुंचने के लिए 100 से ज्यादा सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहां पर दर्शन करने के लिए पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर की सीढ़ी पर पत्थर मारने पर पानी में पत्थर मारने जैसी आवाज सुनाई देती है।
गढमुक्तेश्वर और उसके आसपास में नक्का कुआ , मीरा की रेती , गंगा मन्दिर ,गुरुकुल पूठ , शंकराटीला सहित बहुत से ऐसे पवित्र स्थल हैं जो यहां की प्राचीनता का प्रमाण हैं। गोमुख से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय करके पतित पावनी गंगा यहां पहुँचती है, यहां की आबोहवा, प्राकृतिक सोन्दर्य, शांत वातावरण, लहलहाती फसले यहां पहुचने वाले व्यक्ति को मन्त्रमुग्ध करती हैं।
Garhmukteshwar जाने का सबसे अच्छा समय क्या है ?

यहां जाने का सबसे अच्छा समय मार्च और मई के बीच है। अप्रैल-मई के दौरान गंगा नदी में डॉल्फिन देखी जा सकती है। सर्दियों में गंगा नदी का पानी सबसे ठंडा हो जाता है। गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशाल मेला लगता है वैसे हर माह की पूर्णिमा और अमावश्या पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आकर गंगा में डुबकी लगाते हैं और साथ मन्दिर दर्शन कर गंगा में मोटर बोट का आनंद लेते हैं।