Sunday, April 6, 2025

Krishna Janmashtami 2023: मथुरा में जन्माष्टमी कब 6 या 7 सितंबर ? जानिए यहाँ…

Krishna Janmashtami 2023: कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल भादों मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि 12 बजे को मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस साल, रक्षाबंधन को लेकर जैसा असमंजस हो रहा है, उसी तरह कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भी विवाद है। चलिए जानते हैं कि मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी।

Krishna Janmashtami 2023

कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा आयोजित की जाती है और भगवान के भक्त उपवास भी करते हैं। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष, कृष्ण जन्माष्टमी 7 सितंबर (Krishna Janmashtami 2023) को मनाई जा रही है। इस मौके पर भगवान कृष्ण बचपन में लल्ला, प्रज्ञान-प्रभास की पोशाक पहनेंगे और अपने भक्तों को मोहित करेंगे।

इसके बाद, सोने और चांदी से बनी 100 किलोग्राम की कामधेनु गाय हरिद्वार के गंगाजल और गोमाता के दूध से लल्ला का अभिषेक करेगी। जन्मभूमि पर सजाए जाने वाले फूलों के बंगले का नाम इसरो के मुख्यालय के नेता एस सोमनाथ के नाम पर रखा गया है। भागवत भवन के द्वार पर चंद्रमा और प्रज्ञान का कटौती भी लगाया जाएगा, और संभावना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल हों।

कान्हा की पोशाक का नाम “प्रज्ञान-प्रभास” रखा गया

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2023) के संबंध में प्रेस वार्ता कर जानकारी दी। कपिल शर्मा ने बताया कि कान्हा की पोशाक का नाम “प्रज्ञान-प्रभास” रखा गया है। चंद्रमा के अप्रियतम सौंदर्य में अठखेलियां कर भारतवर्ष के समृद्ध ज्ञान की परंपराओं के संवर्धन में लगे वैज्ञानिक यंत्र “प्रज्ञान” के नाम अनुरूप ठाकुरजी की पोशाक का नाम “प्रज्ञान-प्रभास” दिया गया है।

वैज्ञानिकों को सलामी और सफलता की शुभकामनाएं देना है प्रयास

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के इस प्रयास का भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित होने वाले सभी वैज्ञानिकों को सलामी और सफलता की शुभकामनाएं देना है। पांच पोशाकों का निर्माण किया गया है, जिसमें राधा-कृष्ण के विशाल मुकुट और उनके 30-35 करीगरों द्वारा तैयार की जा रही है। यह कुछ काम बंगाल और कुछ दिल्ली में भी किया गया है।

साथ ही, अनिल द्वारा केशवदेव, गर्भगृह और युगमाया की पोशाक भी तैयार की जा रही है। श्रीकृष्ण के जन्म के बाद, उनका अभिषेक हरिद्वार के गंगाजल से किया जाएगा है। इसके साथ ही, श्रीकृष्ण जन्मस्थान के प्रांगण में एक विशेष कामधेनु गाय के दूध का भी उपयोग होगा, जिसका वजन सोने-चांदी के 100 किलोग्राम के बराबर है। जन्मभूमि के अंदर और उसके चारों ओर से जो भक्तगण आएंगे, वे श्रीकृष्ण के आदिवास को एक अद्वितीय अनुभव करेंगे, चाहे वो किसी दिशा से भी आएं।

गर्भगृह के आंतरिक हिस्से को कारागार की तरह व्यवस्थित किया जाएगा

भगवान श्रीकृष्ण की प्राकट्य भूमि और कारागार के रूप में प्रसिद्ध गर्भगृह और पूर्ण श्रीकृष्ण चबूतरा की सजावट अद्भुत होगी। इस वर्ष, प्रयास किया जाएगा कि गर्भगृह के आंतरिक हिस्से को कारागार की तरह व्यवस्थित किया जा सके। गर्भगृह के बाहरी हिस्से में कोई परिवर्तन किए बिना, श्रीकृष्ण चबूतरा का पुराना रूप संरक्षित रहेगा।

गर्भगृह के बाहरी हिस्से में, भगवान के जन्म से पहली लीलाएं भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रहेंगी। 1008 कमल पुष्पों के साथ भगवान की हज़रत किया जाएगा। सात सितंबर की रात्रि को 12 बजे, भगवान के प्रागट्य के साथ, पूरे मंदिर परिसर में ढोल, नगाड़े, झांझ-मंजीरे, और मृदंग बजेंगे। महंत नृत्य गोपाल दास महाराज की उपस्थिति में जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम का समय सूचना (Krishna Janmashtami 2023)

7 सितंबर की रात्रि को, श्रीकृष्ण जन्म महाभिषेक कार्यक्रम श्रीभागवत भवन मंदिर में आयोजित किया जाएगा।
श्री गणपति और नवग्रहों की स्थापना और पूजा रात 11:00 बजे से शुरू होगी।
सहस्त्रार्चना (कमल के फूल और तुलसी के पत्तों से) रात 11:55 बजे तक चलेगी।
प्राकट्य दर्शन के लिए पट रात 11:59 बजे को बंद किया जाएगा।
प्राकट्य दर्शन और आरती रात 12:00 बजे से 12:05 बजे तक होंगे।
पयोधर महाभिषेक कामधेनु के साथ रात 12:05 बजे से 12:20 बजे तक चलेगा।
रजत कमल में विराजमान ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक रात 12:20 बजे से 12:40 बजे तक होगा।
शृंगार आरती रात 12:40 बजे से 12:50 बजे तक होगी।
शयन आरती रात 1:25 बजे से 1:30 बजे तक होगी।

Krishna Janmashtami 2023

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